South Eastern Railway: दक्षिण पूर्वी रेलवे की ऐतिहासिक परियोजना – पर्वतीय क्षेत्र में रेल निर्माण को बनाया संभव, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर अब दो घंटे में

नई दिल्ली: भारतीय रेल ने उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों और पर्यटन को एक नई दिशा देने वाली परियोजना में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि दक्षिण पूर्वी रेलवे द्वारा “टीबीएम तकनीक” का उपयोग पहाड़ी इलाकों में किया गया है, जो भारत के निर्माण क्षेत्र में एक नई मिसाल प्रस्तुत करता है. उन्होंने कहा, “9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल-शील्ड रॉक टीबीएम ने जिस गति और सटीकता का प्रदर्शन किया, वह अभूतपूर्व है.”अब, योगनगरी ऋषिकेश से तपोनगरी कर्णप्रयाग का सफर महज दो घंटे में पूरा होगा, जो उत्तराखंड के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन खबर है. इस परियोजना का लक्ष्य उत्तराखंड के भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र को एक मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ना है, जिससे तीर्थयात्रियों को चारधाम यात्रा में सुविधा होगी.

महत्वपूर्ण मील का पत्थर: देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का निर्माण

भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का निर्माण इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण है. 14.577 किमी लंबी सुरंग, जो देवप्रयाग और जनासू के बीच स्थित है, अब पूरा हो चुकी है. 16 अप्रैल 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसका उद्घाटन किया. इस सुरंग का निर्माण सिस्मिक जोन IV में किया जा रहा है, जो इसे और भी चुनौतीपूर्ण बनाता है.

आधुनिक तकनीक का उपयोग और रिकॉर्ड बनाना

परियोजना में टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सुरंग निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति हासिल हुई है. TBM ‘शिव’ और ‘शक्ति’ ने अगस्त 2024 में एक महीने में 1080.11 मीटर सुरंग खोदकर नया रिकॉर्ड बनाया, जो निर्माण क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है.

तीर्थ स्थलों के लिए तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा

यह रेल परियोजना 125.2 किमी लंबी ब्रॉड गेज रेल लाइन है, जो ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ती है. सड़क मार्ग से यह यात्रा 6-7 घंटे में पूरी होती है, लेकिन रेल मार्ग से इसे अब केवल दो घंटे में पूरा किया जा सकेगा. यह परियोजना उत्तराखंड के पांच जिलों—देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली—को रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी.

आर्थिक और सामाजिक लाभ

इस परियोजना के परिणामस्वरूप पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी. चारधाम यात्रा के अलावा, ऋषिकेश, हरिद्वार, और औली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल भी रेल मार्ग से जुड़ेंगे, जिससे उत्तराखंड के सुदूर इलाकों में नए व्यापार केंद्रों का विकास होगा. यह परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों के लिए बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करेगी.
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना भारतीय रेल की चारधाम रेल परियोजना का अहम हिस्सा है, जो उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही है. इसके पूरा होने से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व को नई पहचान मिलेगी, साथ ही लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इससे फायदा होगा.

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