Deoghar : हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक देवघर का शिव बारात, फहीम मियां बनते हैं शिव के गण-दूत

 

1994 से शिव बारात में अलग-अलग पात्रों से नजर आते हैं फहीम.

देवघर : शहर के ठाढ़ीदुलमपुर दुर्गापुर निवासी फहीम अंसारी हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि पर देवघर में निकाली जाने वाली शिव बारात में फहीम मियां बाबा भोले के गण-दूत बनते हैं और शिव का जयकारा लगाते हैं। फहीम पेशे से दर्जी हैं और पांचों वक्त के नमाजी हैं। अल्लाह में उनकी प्रगाढ़ आस्था है तो भगवान शिव को भी ये पूजनीय मानते हैं। फहीम कहते हैं बाबा बैद्यनाथ से देवघर की पहचान है और हमलोग उनकी नगरी में रहते हैं तो उनका स्मरण तो बनता ही है। फिर चाहे हमलोग किसी जाति और संप्रदाय से आते हो।

फहीम ब्यूटी क्वीन चुड़ैल की भूमिका निभाएंगे

शिव के प्रति फहीम की ऐसी आस्था है कि अपनी सिलाई मशीन के पास पाक-ए-मक्का मदीना के साथ बैद्यनाथ मंदिर की भी तस्वीर लगा कर रखते हैं। इस बार के शिव बारात में फहीम ब्यूटी क्वीन चुड़ैल की भूमिका निभाएंगे। 1994 से देवघर में शिव बारात निकल रही है और तब से फहीम शिव बारात में अलग-अलग रूपों में शहरवासियों का मनोरंजन तो करते ही है, इस बहाने महाशिवरात्रि पर शिव की अराधना भी कर लेते हैं।

31 सालों से शहर के सबसे बड़े आयोजन में अपनी सहभागिता दे रहे हैं

उन्होंने बताया कि 1994 में शिव बारात में बिच्छुका सुर से अपनी भूमिका की शुरूआत की और लगातार आयोजन 31 सालों से शहर के सबसे बड़े आयोजन में अपनी सहभागिता देते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस शिव बारात के शामिल होने से हमे बहुत अच्छा लगता है और भोलेनाथ के आशीर्वाद से फल-फूल रहा हूं, उनके नगरी में रहकर मुझे गौरवान्वित महसूस होता है। मुझे बहुत गर्व है कि इस बारात के शामिल होने का हमे मौका मिलता है। इस बारात के शामिल होने पर मुझे सभी लोगों से भी काफी सहयोग मिलता और बहुत उत्साह भी रहता है। इस वर्ष भी शिव बारात अपनी सफल आयोजन को पूरा करेगी।

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