Deoghar: देवघर में बोले महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि, मठ-मंदिरों से सरकारी नियंत्रण हटाना आवश्यक

देवघर: निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने आॅपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को कड़ी सीख देने वाली भारतीय सेना की ताकत की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि भारत की तीनों सेनाएं भगवती की उपासक हैं और सेना के कैंप में शक्ति की पूजा होती है। आॅपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाली बहनों—कर्नल शोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह—को उन्होंने साहस और सामर्थ्य का पर्याय बताते हुए वंदनीय और बधाई की पात्र बताया। स्वामी जी ने कहा कि ये दोनों बहनें दुर्गा की प्रतिमूर्ति हैं, जिन्होंने अपने कार्य से साबित कर दिया कि जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवताओं का वास होता है।

पाकिस्तान से नहीं भारत से है लड़ाई, आतंकवाद से है जंग
स्वामी कैलाशानंद ने स्पष्ट किया कि भारत की लड़ाई पाकिस्तान से नहीं बल्कि आतंकवाद से है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन छोड़ दे तो भारत उसे अपना मानने को तैयार है। लेकिन अगर आतंकवाद के साथ उनका गठजोड़ जारी रहा तो भारत सरकार, सेना और जनता कभी पाकिस्तान को माफ नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने दोबारा कोई दुस्साहस किया तो भारत की सेना उसे सांस लेने भी नहीं देगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के साथ भगवान महादेव, गणपति, नारायण और दुर्गा जैसे दिव्य समर्थक हैं।

मोदी को 85 वर्ष तक सेवा का अवसर देना चाहिए
स्वामी कैलाशानंद ने भाजपा संगठन से आग्रह किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 75 वर्ष की उम्र की बजाय 85 वर्ष तक देश की सेवा का मौका दें। उनका मानना है कि मोदी के नेतृत्व में ही काशी विश्वनाथ, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हरिद्वार जैसे पवित्र स्थल अपने वर्तमान स्वरूप में हैं। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के बाद देश में मंदिरों और मठों के जीर्णोद्धार का सबसे बड़ा कार्य मोदी ने किया है।

देवघर कॉरिडोर निर्माण से पहले तीर्थ पुरोहितों से संवाद जरूरी
स्वामी ने कहा कि देवघर में बनने वाले कॉरिडोर के पहले सरकार को स्थानीय तीर्थ पुरोहितों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने पंडा धर्मरक्षिणी सभा से सलाह लेने पर बल दिया क्योंकि यहां करीब 50 हजार तीर्थ पुरोहित निवास करते हैं।

मठ-मंदिरों से सरकारी नियंत्रण हटाना आवश्यक
स्वामी कैलाशानंद ने देश के मठ-मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण और हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग की। उनका कहना था कि ये संस्थान पुजारी, पंडित और महात्माओं के अधीन रहना चाहिए। सरकार का कर्तव्य केवल देखरेख तक सीमित होना चाहिए, कब्जा नहीं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा से बात हुई है और दशनाम संन्यासियों के मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार करने के लिए उनकी जिम्मेदारी लेने की बात कही है। इस संबंध में वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एनडी मिश्रा, पंडा धर्मरक्षिणी सभा के महामंत्री निर्मल झा मंटू और बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य प्रबंधक रमेश परिहस्त उपस्थित थे।

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