पोटका : जिला स्वास्थ्य समिति, पूर्वी सिंहभूम के सौजन्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में साहियाओं के बीच डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास को दूर कर लोगों को जागरूक करना था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ ने कहा कि प्राचीन मान्यताओं के कारण आज भी समाज में डायन प्रथा जैसी कुरीतियां मौजूद हैं। कई बार संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण महिलाओं पर डायन होने का आरोप लगाया जाता है। विशेष रूप से विधवा या अकेली महिला को निशाना बनाकर सामाजिक बहिष्कार या उनकी संपत्ति हड़पने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि ओझा या तांत्रिकों द्वारा किसी को डायन घोषित करना सामाजिक हिंसा को बढ़ावा देना है।
डॉ. महाकुड़ ने कहा कि डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कलंक है, जिसे समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक सोच, शिक्षा और जागरूकता बेहद जरूरी है। झारखंड में डायन प्रथा निवारण अधिनियम 2001 के तहत दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव ने कहा कि हाल ही में डायन के नाम पर हत्या की घटना समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से इस कुरीति को खत्म करने के लिए सामूहिक संकल्प लेने की अपील की। इस अवसर पर बीपीएम अनामिका सिंह, एमपीडब्ल्यू उपेंद्र नाथ मोदीना, संजय चटर्जी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।