West Singhbhum: वर्षों से जर्जर सड़क बन चुकी है दुर्घटना का कारण- जनता ने लगाई आशा, लेकिन राहत अब तक नहीं

समाजसेवी नन्दलाल कुमार गुप्ता

पश्चिमी सिंहभूम: नन्दपुर (मनोहरपुर) निवासी समाजसेवी नन्दलाल कुमार गुप्ता ने अंकुवा मोड़ से चिड़िया माइंस तक जाने वाली पाँच किलोमीटर लंबी सड़क की दुर्दशा पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग राज्य बने दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं, फिर भी राज्य के कई हिस्से आज भी बुनियादी विकास से वंचित हैं.

अंकुवा मोड़ से चिड़िया माइंस तक की यह सड़क सालों से जर्जर हालत में है. इस पर न तो कोई मरम्मत हुई, न ही नया निर्माण. समाजसेवी गुप्ता के अनुसार, यह स्थिति सरकार की उदासीनता का परिचायक है.

करोड़ों का राजस्व, लेकिन सड़क नहीं
गुप्ता ने बताया कि विश्वप्रसिद्ध चिरिया माइंस से सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, फिर भी चिरिया-अंकुवा पीडब्ल्यूडी सड़क आज तक पक्की नहीं बन पाई है.

बीते दस वर्षों में दो बार निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन अधूरा ही छोड़ दिया गया. 2012 में सारंडा एक्शन प्लान के तहत एनपीसीसी को सड़क निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी. 357.18 लाख की लागत से इसका निर्माण होना था. बोर्ड तो लगा, लेकिन निर्माण कार्य कभी शुरू नहीं हुआ.

एनपीसीसी का बोर्ड, लेकिन काम नदारद
यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुई थी और इसके लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वित्तीय स्वीकृति भी दी थी. एनपीसीसी द्वारा निर्माण कार्य किया जाना था, लेकिन बीते एक दशक में बोर्ड लगाने के सिवाय कोई कार्य नहीं हुआ.

तीन गांवों के हजारों लोग, माइंस के कर्मचारी, अधिकारी और आने-जाने वाले लोग इस खराब सड़क से गुजरने को मजबूर हैं. बरसात में यह सड़क कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है.

सेल प्रबंधन पर उठते सवाल
गुप्ता ने कहा कि सेल प्रबंधन केवल माइंस से लौह अयस्क निकालने तक सीमित हो गया है. क्षेत्र की जनता की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं.

क्षेत्रवासियों का कहना है कि चिरिया के पत्थर से देश के शहर चकाचौंध हैं, लेकिन चिरिया की अपनी हालत बदतर है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो जनता आंदोलन करने को मजबूर होगी और लौह अयस्क का उत्पादन व डिस्पैच बंद कर देगी.

नेताओं से अपेक्षा, लेकिन परिणाम अधूरे
समाजसेवी गुप्ता ने कहा कि लोगों ने वर्तमान विधायक जगत मांझी और सांसद जोबा मांझी को इसी उम्मीद से चुना कि वे इस सड़क के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे. यह सड़क क्षेत्र के विकास की धुरी है और इसका बनना जनसामान्य के लिए अत्यंत आवश्यक है.

जनता अब भी आशा लगाए बैठी है कि इस बार वादे पूरे होंगे और जर्जर सड़क की जगह एक सुदृढ़ मार्ग मिलेगा जो क्षेत्र में विकास की नई रोशनी लेकर आएगा.

 

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