नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई अभूतपूर्व घटना ने सभी को चौंका दिया। अदालत में पेश हुए वकील राकेश किशोर (71 वर्ष) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें हिरासत में ले लिया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
घटना के बाद राकेश किशोर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें इस काम का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने दावा किया, “मुझे एक दैवीय शक्ति ने ऐसा करने को कहा था। अगर मैं जेल चला जाता, तो भी मुझे अफसोस नहीं होता। मेरा परिवार मेरे इस कदम से खुश नहीं है, वे समझ नहीं पा रहे हैं।”
जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब CJI गवई खजुराहो के एक मंदिर में भगवान विष्णु की टूटी हुई मूर्ति की बहाली से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सख्त कार्रवाई करते हुए वकील राकेश किशोर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने आदेश जारी करते हुए कहा कि वकील का यह व्यवहार न केवल अदालत की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि यह अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और आचार संहिता का भी उल्लंघन है।
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि में राकेश किशोर देश के किसी भी न्यायालय, प्राधिकरण या अधिकरण में पेश नहीं हो सकेंगे।
साथ ही, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
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